किस नाम से बुलाऊं तुमको कितने सारे नाम है?
कौन से तीरथ जाऊं मैं कितने सारे धाम है?
मन को मंदिर बनालूं,
उसमें तुमको बसा लूं।
मन को मंदिर बनालूं,
उसमें तुमको बसा लूं।
और कुछ न आए मुझको इतना बस कम है...…।
किस नाम से बुलाऊं तुमको कितने सारे नाम है?
कौन से तीरथ जाऊं मैं कितने सारे धाम है?
कौन से भजन गाउं में कितने सारे लेख है?
कौन से मंत्र पढूंगी प्रभु जी मंत्र तो अनेक है?
मंत्र मुग्ध खुद को ही कर लूं,
तुम्हारी स्मरण में सांसे भर लूं।
मंत्र मुग्ध खुद को ही कर लूं,
तुम्हारी स्मरण में सांसे भर लूं।
अंतर मन से भक्ति कर लूं बस इतना ही शेष है.......
कौन से भजन गाउं में कितने सारे लेख है?
कौन से मंत्र पढूंगी प्रभु जी मंत्र तो अनेक है?
किस विधि से करूं में पूजा विधियां भिन्न भिन्न है?
किस रीति से करूं अर्चन रीति भी विभिन्न है?
पूर्ण रूप से कर लूं समर्पण,
चरणों में कर लूं श्रद्धा अर्पण।
पूर्ण रूप से कर लूं समर्पण,
चरणों में कर लूं श्रद्धा अर्पण।
इस कलयुग में अस्थाई सबकुछ बस तुम ही अक्षुर्ण हो.....
किस विधि से करूं में पूजा विधियां भिन्न भिन्न है?
किस रीति से करूं अर्चन रीति भी विभिन्न है?
कौन से व्यंजन भोग लगाऊं व्यंजन तो बहुत है?
सब तो तुम्हारे देन है जो भी यहां उपलब्ध है।
श्रद्धा अश्रु से चरण पखार,
भक्ति परोसें मन का थाल।
श्रद्धा अश्रु से चरण पखार,
भक्ति परोसें मन का थाल।
बस इतना गुहार प्रभुजी तुम्हारे चरणों मेरा अंत हो।
बस इतना ही जानू प्रभुजी तुम्हीं तो अनंत हो।।




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