सुबह लगे कितनी प्यारी गlए कोयल गीत ,
खिलती कलियां ढूंढे भंवरे जैसे मन के मित ।
सूरज चमके लालिमा जैसे माथे टीका ,
सोभा इतना बढ़े धरा की स्वर्ग भी लगे फीका ।
हरी साड़ी पहने धरती लगती जैसे दुल्हन ,
मन को मोह लेता है मंद मंद बहता पवन ।
नीले नीले गगन में तैरते हुए बादल ,
छुपन छुपाई खेले जैसे कोमल बालक चंचल ।
पहाड़ों को चीर के बहता झरना पानी ,
कहीं सुंदर झील किनारे नाचते दिखे मोरनी ।
इतनी सुंदर रचना देख भावुक कवि का मन ,
अश्रु भरी पलकों से भीगे कवि नयन ।




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