जागो उठो ऐ भारत वासी आया युग ये योग का ।
थोड़ा तो तुम समय निकालो जीवन है जो भोग का ।।
त्राहि त्राहि दुनियां करती रोग का है राज यहां ।
एक बार योग पथ पे अlजा जीवन का है सlज जहां ।।
नीत भोर से अlये गुरुवर गाने योग के गीत नया ।
जो जागे वो पाए साथी फिर तू कैसे सोया रहा ।।
स्वाथ्य ही संपद होता प्यारे हीरे मोती पड़ते फीके ।
जरा ब्याधी से मुक्त होजाए गर नीत उठ कर योग सीखे ।।
हाय हाय कर कटता जीवन काम न आए दौलत धन ।
योग के पथ पर चलकर देख सफल हो जाएगा जीवन ।।
काम न आते पति पुत्र बंधु सखा सहोदर भी ।
अगर जीवन को घिरते रहते सदा ही जिसके रोग ब्याधि ।।
पत्नी प्रेमी प्रेम भी धुंधला दिखता है जब रोग सताए ।
धन कमा के मन न भरता फिर तू काहे रोग कमाए ।।
समय रहते तू जाग जा प्यारे काहे अपना समय गंवाए ।
योग है वो संदूक जिसमे स्वास्थ्य का धन समाए ।।




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