जिंदगी जीना शिखा दिया(प्रणति साहू)

       


जिंदगी जीना सीखा दिया


तूने तो जिंदगी जीना सीखा दिया।

मरती थी पल पल सांसे लेना सीखा दिया।।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।।

उलझ गई थी जंजlलों में फिर से सुलझना सीखा दिया।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।

भूल गई थी हंसना आंसुओं के अlड में फिर से मुस्कुराना सिखा दिया।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।

निकली थी तलास में खुशियों की,

पर खुशियां तो अपने अंदर होता है , इतनी गहरी बात बता गया।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।

नफरत के कांटो में प्यार का गुलाब चुनना सीखा दिया।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।

क्रोध हिंसा की ज्वालामुखी से सांति को ढूंढना सीखा दिया।

जिंदगी जीना सीखा दिया।।

तूने तो जिंदगी जीना सीखा दिया।।।

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