अरज (प्रणति साहू, प्रोफेसर कालोनी,रायपुर)

 



साई तेरी चरणों में अरज लगाऊं।

तू ही एक अlश साई इतना में जानू।।

सुख आए दुख आए तू ही याद आए 

तेरे बिन साई मुझे समझ कुछ न आए।।

तेरे देख रेख में मेरा ये संसार है।

तेरी छत्र छाया में मेरा परिवार है ।।

मेरी माथे शोभा बने चरणों की धूल तेरी।

तेरी करुणा से सदा सौभाग्य बने मेरी।।

इतना अरज साई छूटे ना हाथ तेरा।

टूटे न बिस्वास छूटे ना साथ तेरा।।

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